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Showing posts with the label Hafiz Ghulam Mustafa Qadri
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वलवला-ए-इश्क़-ओ-उल्फ़त आया क़ुर्बानी का दिन / Walwala-e-Ishq-o-Ulfat Aaya Qurbani Ka Din

क़ुर्बानी है रब के लिए और शुक्राना सब के लिए वलवला-ए-'इश्क़-ओ-उल्फ़त, आया क़ुर्बानी का दिन ये है इब्राहीमी सुन्नत, आया क़ुर्बानी का दिन क़ुर्बानी है रब के लिए और शुक्राना सब के लिए आया क़ुर्बानी का दिन, आया क़ुर्बानी का दिन आया क़ुर्बानी का दिन, आया क़ुर्बानी का दिन जानवर और माल का सदक़ा हैं ये क़ुर्बानियाँ होगी घर-भर की हिफ़ाज़त, आया क़ुर्बानी का दिन क़ुर्बानी है रब के लिए और शुक्राना सब के लिए आया क़ुर्बानी का दिन, आया क़ुर्बानी का दिन आया क़ुर्बानी का दिन, आया क़ुर्बानी का दिन है हदीस-ए-मुस्तफ़ा और हिस्सा-ए-क़ुरआन है ये है क़ुर्बानी 'इबादत, आया क़ुर्बानी का दिन क़ुर्बानी है रब के लिए और शुक्राना सब के लिए आया क़ुर्बानी का दिन, आया क़ुर्बानी का दिन आया क़ुर्बानी का दिन, आया क़ुर्बानी का दिन ऐ उजागर ! ख़ुश-दिली से जानवर क़ुर्बान कर मिलती है अल्लाह की क़ुर्बत, आया क़ुर्बानी का दिन क़ुर्बानी है रब के लिए और शुक्राना सब के लिए आया क़ुर्बानी का दिन, आया क़ुर्बानी का दिन आया क़ुर्बानी का दिन, आया क़ुर्बानी का दिन शायर: अल्लामा निसार अली उजागर ना'त-ख़्वाँ: हाफ़िज़ ग़ुलाम मुस्तफ़ा क़ादरी ...

आक़ा का नाम लेना बड़े एहतिराम से / Aaqa Ka Naam Lena Bade Ehtiram Se

नाम-ए-अहमद का वज़ीफ़ा है हर इक ग़म का 'इलाज लाख खतरें हों इसी नाम से टल जाते हैं आक़ा का नाम लेना बड़े एहतिराम से उन पर दुरूद पढ़ना बड़े एहतिराम से ख़ाक-ए-मदीना चूमना, रहना अदब के साथ तयबा में जब भी जाना बड़े एहतिराम से महफूज़ सय्यिदा हैं, ख़ता इन से कैसे हो ज़हरा का ज़िक्र करना बड़े एहतिराम से लाज़िम है ज़िक्र-ए-हैदर-ए-कर्रार का अदब बज़्म-ए-'अली सजाना बड़े एहतिराम से तुम दश्त-ए-दर्द पार करोगे सुकून से बारह इमाम कहना बड़े एहतिराम से जन्नत के शाहज़ादे, उजागर ! हसन-हुसैन चूमे ये नाम वल्लाह बड़े एहतिराम से ये नाम कोई काम बिगड़ने नहीं देता बिगड़े भी बना देता है ये नाम-ए-मुहम्मद शायर: अल्लामा निसार अली उजागर ना'त-ख़्वाँ: हाफ़िज़ ग़ुलाम मुस्तफ़ा क़ादरी naam-e-ahmad ka wazeefa hai har ik Gam ka 'ilaaj laakh khatre.n ho.n isi naam se Tal jaate hai.n aaqa ka naam lena ba.De ehtiraam se un par durood pa.Dhna ba.De ehtiraam se KHaak-e-madina choomna, rehna adab ke saath tayba me.n jab bhi jaana ba.De ehtiraam se mehfooz sayyida hai.n, KHata in se kaise ho ...

आक़ा तुम्हारे दर पर आना अच्छा लगता है / Aaqa Tumhare Dar Par Aana Achchha Lagta Hai

आक़ा तुम्हारे दर पर आना अच्छा लगता है आँख में ख़ाक-ए-तयबा लगाना अच्छा लगता है गुंबद-ए-ख़ज़रा के साए में हाल-ए-दिल अपना रो रो कर आक़ा को सुनाना अच्छा लगता है बैठ के जन्नत की क्यारी में रोती आँखों को छुप छुप कर मिम्बर पे उठाना अच्छा लगता है बैठ के 'आशिक़ की संगत में ना'तें पढ़ पढ़ कर याद में तेरी रोना रुलाना अच्छा लगता है बैठ के 'आशिक़ की महफ़िल में ना'तें पढ़ पढ़ कर याद में तेरी रोना रुलाना अच्छा लगता है ना'त-ख़्वाँ: ओवैस रज़ा क़ादरी हाफ़िज़ ग़ुलाम मुस्तफ़ा क़ादरी aaqa tumhaare dar par aana achcha lagta hai aankh me.n KHaak-e-tayba lagaana achcha lagta hai gumbad-e-KHazra ke saae me.n haal-e-dil apna ro ro kar aaqa ko sunaana achcha lagta hai baiTh ke jannat ki kyaari me.n roti aankho.n ko chhup chhup kar mimbar pe uThaana achcha lagta hai baiTh ke 'aashiq ki sangat me.n naa'te.n pa.Dh pa.Dh kar yaad me.n teri rona rulaana achcha lagta hai baiTh ke 'aashiq ki mehfil me.n naa'te.n pa.Dh pa.Dh kar yaad me.n teri rona rulaana achcha ...

मुस्तफ़ा के पाले हैं हम बरेली वाले हैं / Mustafa Ke Pale Hain Hum Bareilly Wale Hain

Mustafa Ke Pale Hain Hum Bareilly Wale Hain Lyrics in Hindi & English मुस्तफ़ा के पाले हैं, हम बरेली वाले हैं दिल से भोले-भाले हैं, हम बरेली वाले हैं दम रज़ा का भरते हैं, हम बरेली वाले हैं ख़्वाजा ख़्वाजा करते हैं, हम बरेली वाले हैं ना'त-ए-मुस्तफ़ा पढ़ के, ज़िक्र-ए-औलिया कर के छठी हम मनाते हैं, हम बरेली वाले हैं मस्लक-ए-मु'ईनुद्दीं ही रज़ा का मस्लक है सब को ये बताते हैं, हम बरेली वाले हैं सुन्नियत के जितने भी दहर में सलासिल हैं उन सभी के ना'रे हैं, हम बरेली वाले हैं मस्लक-ए-रज़ा से हर बातिल क़ौम चिड़ती है हक़ पर हैं जो कहते हैं, हम बरेली वाले हैं डगमगा नहीं सकते मिस्ल-ए-सुल्ह-ए-कुल्ली हम मुस्तहकम 'अक़ीदे हैं, हम बरेली वाले हैं सिद्दीक़-ओ-'उमर, 'उस्माँ, मुर्तज़ा भी हैं अपने हर-सू बोल-बाले हैं, हम बरेली वाले हैं ख़ादिम-ए-सहाबा हैं, हम गदा-ए-अहल-ए-बैत ए'तिदाल वाले हैं, हम बरेली वाले हैं ग़ौस के हैं शैदाई, अशरफ़ के हैं मतवाले ख़्वाजा के दिवाने हैं, हम बरेली वाले हैं दा'वा-ए-हुब्ब-ए-ख़्वाजा, राफ़िज़ी का झूटा है ख़्वाजा बस हमारे हैं, हम बरेली वाले हैं हाम...

खिली खिली कलियाँ हैं तयबा की गलियाँ हैं / Khili Khili Kaliyan Hain Taiba Ki Galiyan Hain

खिली खिली कलियाँ हैं, तयबा की गलियाँ हैं खिली खिली कलियाँ हैं, तयबा की गलियाँ हैं 'अजब दिल-कुशा हैं मदीने की गलियाँ मु'अत्तर हैं यूँ जैसे फूलों की कलियाँ खिली खिली कलियाँ हैं, तयबा की गलियाँ हैं खिली खिली कलियाँ हैं, तयबा की गलियाँ हैं मदीने की हर शय नफ़ासत-भरी है मदीने से का'बे को 'इज़्ज़त मिली है वहीं की तो फूलों में ख़ुश्बू बसी है सबा वज्द में झूम कर कह रही है खिली खिली कलियाँ हैं, तयबा की गलियाँ हैं खिली खिली कलियाँ हैं, तयबा की गलियाँ हैं वो गलियाँ जहाँ पर मलक सर झुकाएँ वो गलियाँ कि 'आशिक़ के दिल में समाएँ वो गलियाँ कि हैं जिन की प्यारी अदाएँ किसी को हँसाएँ, किसी को रुलाएँ खिली खिली कलियाँ हैं, तयबा की गलियाँ हैं खिली खिली कलियाँ हैं, तयबा की गलियाँ हैं मुरादें यहीं से गदा पा रहे हैं सलातीं यहाँ हाथ फैला रहे हैं बशर क्या मलाइक यहाँ आ रहे हैं झुका कर सर-ए-'इज्ज़ फ़रमा रहे हैं खिली खिली कलियाँ हैं, तयबा की गलियाँ हैं खिली खिली कलियाँ हैं, तयबा की गलियाँ हैं मदीने को जिस वक़्त घर से चलूँगा तो फिर किस के रोके से मैं रुक सकूँगा कहे लाख कोई न ह...

मौला तू दे सआदत हज पर बुला ले मौला / Maula Tu De Saadat Hajj Par Bula Le Maula

Maula Tu De Saadat Hajj Par Bula Le Maula Lyrics in Hindi & English मौला ! तू दे स'आदत, हज पर बुला ले, मौला ! का'बे की हो ज़ियारत, हज पर बुला ले, मौला ! मौला ! तू दे स'आदत, हज पर बुला ले, मौला ! लाखों हैं जाने वाले, लाखों ही रह गए हैं है सब दिलों की हसरत, हज पर बुला ले, मौला ! मौला ! तू दे स'आदत, हज पर बुला ले, मौला ! कहने को दूर हैं हम, दिल है मगर वहाँ पर ये ख़्वाब हो हक़ीक़त, हज पर बुला ले, मौला ! मौला ! तू दे स'आदत, हज पर बुला ले, मौला ! हज की लगन हो दिल में, एहराम हो बदन पर लब पर हो तेरी मिदहत, हज पर बुला ले, मौला ! मौला ! तू दे स'आदत, हज पर बुला ले, मौला ! 'अर्फ़ात का हो मंज़र, माँगूँ दु'आएँ रो कर बख़्शिश की दे ज़मानत, हज पर बुला ले, मौला ! मौला ! तू दे स'आदत, हज पर बुला ले, मौला ! मुज़्दल्फ़ा का हो डेरा, हो हाजियों का फेरा मुझ पर भी कर दे रहमत, हज पर बुला ले, मौला ! मौला ! तू दे स'आदत, हज पर बुला ले, मौला ! रहमत के इस जबल पर हाज़िर हो ये उजागर ऐसी मिले इजाज़त, हज पर बुला ले, मौला ! मौला ! तू दे स'आदत, हज पर बुला ले, ...

आस्ताँ है कितना प्यारा फ़ाइल-उल-ख़ैरात का | या फ़ाइल-अल-ख़ैरात अमीर-ए-हम्ज़ा / Aastan Hai Kitna Pyara Faailul Khairat Ka | Ya Faailul Khairat Ameer-e-Hamza

आस्ताँ है कितना प्यारा फ़ा'इल-उल-ख़ैरात का कह रहा है हर दीवाना फ़ा'इल-उल-ख़ैरात का अद्रिकनी या हम्ज़ा ! अद्रिकनी या हम्ज़ा ! अद्रिकनी या हम्ज़ा ! अद्रिकनी या हम्ज़ा ! नूर से धुल जाए बंदा फ़ा'इल-उल-ख़ैरात का ऐसा नूरी आस्ताना फ़ा'इल-उल-ख़ैरात का या फ़ा'इल-अल-ख़ैरात ! या काशिफ़-अल-कमाल ! या फ़ा'इल-अल-ख़ैरात ! या काशिफ़-अल-कमाल ! क्या समाँ है 'उर्स आया फ़ा'इल-उल-ख़ैरात का झूमता है हर दीवाना फ़ा'इल-उल-ख़ैरात का अद्रिकनी या हम्ज़ा ! अद्रिकनी या हम्ज़ा ! अद्रिकनी या हम्ज़ा ! अद्रिकनी या हम्ज़ा ! उस रसूल-ए-पाक की प्यारी ज़ुबान-ए-पाक से आप ने पाया है तमग़ा फ़ा'इल-उल-ख़ैरात का या फ़ा'इल-अल-ख़ैरात ! या काशिफ़-अल-कमाल ! या फ़ा'इल-अल-ख़ैरात ! या काशिफ़-अल-कमाल ! मिल गई गोया मुझे दोनों जहाँ की ने'मतें झोली में आया जो टुकड़ा फ़ा'इल-उल-ख़ैरात का अद्रिकनी या हम्ज़ा ! अद्रिकनी या हम्ज़ा ! अद्रिकनी या हम्ज़ा ! अद्रिकनी या हम्ज़ा ! इक तरफ़ जब्ल-ए-उहुद, पहलू में शुहदा-ए-उहुद दरमियाँ है प्यारा रौज़ा फ़ा'इल-उल-ख़ैरात का या फ़ा'इल-अल-ख़ैरात ! या काशिफ़-अल-कमाल ! या फ़ा...

झूम उठा सारा जहाँ आक़ा तेरे आने से / Jhoom Utha Sara Jahan Aaqa Tere Aane Se

झूम उठा सारा जहाँ, सारा जहाँ, सारा जहाँ आक़ा ! तेरे आने से, मौला ! तेरे आने से या रसूलल्लाह ! या हबीबल्लाह ! या रसूलल्लाह ! या हबीबल्लाह ! ह़बदा या मुस्तफ़ा ! ह़बदा या मुस्तफ़ा ! ह़बदा या मुस्तफ़ा ! ह़बदा या मुस्तफ़ा ! क्या कशिश है, कैसा रौशन आमिना का चाँद है इस के आगे रंग देखो चाँद का भी माँद है झूम उठा सारा जहाँ, सारा जहाँ, सारा जहाँ आक़ा ! तेरे आने से, मौला ! तेरे आने से बारहवीं के दिन तेरी 'अज़मत पे हों लाखों सलाम मुस्तफ़ा की आमद-ओ-बे'सत पे हों लाखों सलाम झूम उठा सारा जहाँ, सारा जहाँ, सारा जहाँ आक़ा ! तेरे आने से, मौला ! तेरे आने से मुस्तफ़ा का जश्न देखो रौशनी का बाग़ है रात के माथे पे सुब्ह-ए-ज़िंदगी का बाग़ है झूम उठा सारा जहाँ, सारा जहाँ, सारा जहाँ आक़ा ! तेरे आने से, मौला ! तेरे आने से जश्न-ए-मीलाद-ए-मोहम्मद हम मनाएँगे ज़रूर जलने वालों को क़सम रब की जलाएँगे ज़रूर झूम उठा सारा जहाँ, सारा जहाँ, सारा जहाँ आक़ा ! तेरे आने से, मौला ! तेरे आने से फ़लसफ़ा ये ज़िंदगी का ज़ाहिर-ओ-बातिन से है सिलसिला ख़ुशियाँ मनाने का अज़ल के दिन से है झूम उठा सारा जहाँ, सारा जहाँ, सारा जहाँ आक़...

ओवैसियों में बैठ जा बिलालियों में बैठ जा / Owaisiyon Mein Baith Ja Bilaliyon Mein Baith Ja

ओवैसियों में बैठ जा, बिलालियों में बैठ जा तलब है कुछ तो बे-तलब सवालियों में बैठ जा ये मा'रिफ़त के रास्ते हैं अहल-ए-दिल के वास्ते जुनैदियों से जा के मिल, ग़ज़ालियों में बैठ जा जो चाहता है गुल्सितान-ए-मुस्तफ़ा की नौकरी तो बू-ए-मुस्तफ़ा पहन के मालियों में बैठ जा दुरूद पढ़, नमाज़ पढ़, 'इबादतों के राज़ पढ़ सफ़ें तो सब बिछी हैं, 'इश्क़वालियों में बैठ जा हर एक साँस पर जो उन को देखने का शौक़ है तो आँख बन के उन के दर की जालियों में बैठ जा अगर हैं ख़ल्वतें 'अज़ीज़ तो हुजूम में निकल अगर सुकून चाहिए, धमालियों में बैठ जा मुज़फ़्फ़र ! आप तक रसाई इतनी सहल तो नहीं तवज्जोह चाहिए तो यर्ग़मालियों में बैठ जा शायर: मुज़फ़्फ़र वारसी ना'त-ख़्वाँ: ओवैस रज़ा क़ादरी हाफ़िज़ ग़ुलाम मुस्तफ़ा क़ादरी owaisiyo.n me.n baiTh jaa, bilaaliyo.n me.n baiTh jaa talab hai kuchh to be-talab sawaaliyo.n me.n baiTh jaa ye maa'rifat ke raaste hai.n ahl-e-dil ke waaste junaidiyo.n se jaa ke mil, Gazaaliyo.n me.n baiTh jaa jo chaahta hai gulsitaan-e-mustafa ki naukari to boo-e-mustafa pahan ke ma...

हज पे भी हम को बुला ले ऐ मेरे परवरदिगार / Hajj Pe Bhi Hum Ko Bula Le Aye Mere Parwardigar

या रब्बी ! या रब्बी ! या रब्बी ! या रब्बी ! हज पे भी हम को बुला ले, ऐ मेरे परवरदिगार ! ता-कि हम भी देख लें इन आँखों से तेरा दियार अल्लाह ! अल्लाह ! अल्लाह ! अल्लाह ! अल्लाह ! अल्लाह ! अल्लाह ! अल्लाह ! वो दिन भी तो आएगा, मैं हज पर जाऊँगा वो दिन भी तो आएगा, मैं हज पर जाऊँगा ये शरफ़ कर दे 'अता मुझ को तुफ़ैल-ए-मुस्तफ़ा ख़ाना-ए-का'बा के मैं चक्कर लगाऊँ सात बार हज पे भी हम को बुला ले, ऐ मेरे परवरदिगार ! अल्लाह ! अल्लाह ! अल्लाह ! अल्लाह ! अल्लाह ! अल्लाह ! अल्लाह ! अल्लाह ! थाम कर के ख़ाना-ए-का'बा की चादर, या ख़ुदा ! जुर्मों पे कर के नदामत रोऊँ मैं ज़ार-ओ-क़तार का'बा दिखा दे, मौला ! ज़मज़म पिला दे, मौला ! संग-ए-अस्वद का लूँ बोसा, आब-ए-ज़मज़म भी पिऊँ ये तमन्ना कर दे पूरी, ऐ ख़ुदा-ए-किर्दगार ! हज पे भी हम को बुला ले, ऐ मेरे परवरदिगार ! वो दिन भी तो आएगा, मैं हज पर जाऊँगा वो दिन भी तो आएगा, मैं हज पर जाऊँगा जब चलें हुज्जाज मुज़्दलिफ़ा-ओ-'अर्फ़ात-ओ-मिना या ख़ुदा ! उन हाजियों में मुझ को भी करना शुमार हज पे भी हम को बुला ले, ऐ मेरे परवरदिगार ! अल्लाह ! अल्लाह ! अल्लाह ...

लजपाल नबी मेरे दर्दां दी दवा देणा / Lajpal Nabi Mere Dardan Di Dawa Dena

लजपाल नबी मेरे दर्दां दी दवा देणा जदों वक़्त-ए-नज़ा' आवे, दामन दी हवा देणा मैं ना'त तेरी पढ़ना, मैं ज़िक्र तेरा करना इस ज़िक्र दी बरकत नाल मेरी क़ब्र वसा देणा मर चल्लियाँ हाँ रो रो के, विच हिज्र दे महबूबा बेचैन निगाहवाँ नूँ दीदार करा देणा दिल रोंदा ए जाँदे ने जदों लोक मदीने नूँ हुण सानूँ वी या आक़ा ! दरबार विखा देणा सरकार दी महफ़िल विच झोली हाँ विछा बैठे लज रख लवीं लजपाला ख़ाली नाँ उठा देणा सरकार दी महफ़िल विच झोली हाँ विछा बैठे लज रख लै वें लजपाला ख़ाली नाँ उठा देणा ख़ैरात 'अता करना सरकार दी मर्ज़ी ए मेरा ते सी कम ऐनाँ झोली नूँ विछा देणा साइम दी तमन्ना एँ, रहवाँ आ के मदीने विच पावें तयबा दे कुतियाँ दे पैराँ च बिठा देणा शायर: अल्लामा साइम चिश्ती ना'त-ख़्वाँ: उस्ताद नुसरत फ़तेह अली ख़ान ओवैस रज़ा क़ादरी सय्यिद हस्सानुल्लाह हुसैनी lajpaal nabi mere dardaa.n di dawa dena jado.n waqt-e-nazaa' aawe, daaman di hawa dena mai.n naa't teri pa.Dhna, mai.n zikr tera karna is zikr di barkat naal meri qabr wasa dena mar challiyaa.n haa.n ro ro ke,...

हमारी है दुआ शह-ए-ग़ौस-उल-वरा हरा भरा रहे ये क़ादरी चमन / Hamari Hai Dua Shah-e-Ghaus-ul-wara Hara Bhara Rahe Ye Qadri Chaman (All Versions)

हमारी है दु'आ, शह-ए-ग़ौस-उल-वरा ! हरा-भरा रहे ये क़ादरी चमन हमारी है दु'आ मैं क़ादरी हूँ, शुक्र है रब्ब-ए-क़दीर का हाथों में मेरे हाथ है पीरान-ए-पीर का हमारी है दु'आ, शह-ए-ग़ौस-उल-वरा ! हरा-भरा रहे ये क़ादरी चमन हमारी है दु'आ इमदाद कुन, इमदाद कुन, अज़ बंदे ग़म आज़ाद कुन दर दीन-ओ-दुनिया शाद कुन, या ग़ौस-ए-आज़म दस्त-गीर ! हमारी है दु'आ, शह-ए-ग़ौस-उल-वरा ! हरा-भरा रहे ये क़ादरी चमन हमारी है दु'आ जिस का कोई नहीं है सहारा, उस के तुम हो सहारा क़ुर्बां जाऊँ मैं, ऐ मेरे मीराँ ! है कितना प्यारा सहारा चलो, ऐ 'आशिक़ो ! चल के अब देख लो खिला है नूर से ये क़ादरी चमन हमारी है दु'आ, शह-ए-ग़ौस-उल-वरा ! हरा-भरा रहे ये क़ादरी चमन हमारी है दु'आ तेरे क़दमों में जो मौत आए, वो मौत कितनी हसीं हो ! बख़्शा जाऊँगा रोज़-ए-क़यामत, इतना मुझ को यक़ीं है तमन्ना है मेरी, हो चादर आप की ख़ुदा करे, यही बने मेरा कफ़न हमारी है दु'आ, शह-ए-ग़ौस-उल-वरा ! हरा-भरा रहे ये क़ादरी चमन हमारी है दु'आ ना'त-ख़्वाँ: हाफ़िज़ ग़ुलाम मुस्तफ़ा क़ादरी मिले ये नौकरी, करूँ मैं चाकरी...